15 करोड़ की लागत से बने संविधान साहित्य वाटिका का लोकसभा अध्यक्ष ने किया लोकार्पण* मुरादाबाद के कारीगरों के शिल्प दुनिया में भारत की पहचान बनाते हैं – लोकसभा अध्यक्ष*

मुरादाबाद शहर स्थित बुद्धि विहार में नगर निगम मुरादाबाद द्वारा करीब 15 करोड़ रुपए की लागत से तैयार संविधान साहित्य वाटिका का माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने लोकार्पण किया। उन्होंने लोकार्पण के उपरांत पूरे वाटिका का भ्रमण किया और भित्ति चित्रों एवं अन्य आकर्षक प्रतिमाओं का जायजा लिया। माननीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज मुरादाबाद की धरती के लिए ऐतिहासिक दिन है। इस धरती पर बनी संविधान साहित्य वाटिका आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक होगी।
भारत की संस्कृति, साहित्य और विरासत हम सब को आज भी प्रेरित करती है। मुरादाबाद के साहित्यकार, लेखक और विचारकों ने अपनी लेखनी, विचार और गीतों से देश और दुनिया को नया विचार देने का काम किया है। यह धरती पीतल की धरती है जहां के कारीगरों के शिल्प दुनिया में भारत की पहचान बनाते हैं। इस संविधान साहित्य वाटिका के माध्यम से लोकतंत्र के मूल्य और विचारों से आने वाली पीढ़ी प्रेरणा लेगी। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता हमारी ताकत है। दुनिया में यही विविधता हमारी सामर्थ्य बनी है। स्वतंत्रता के बाद हमने लोकतंत्र के विचारों को आत्मसात करके प्रगति की है। इस संविधान साहित्य वाटिका से आने वाली पीढ़ी को अपने कर्तव्यों और दायित्वों का बोध होगा। मुरादाबाद में यह वाटिका लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संविधान के मूल सिद्धांतों को दर्शाता है। यह एक ऐसा स्थान है जो कला, इतिहास और नागरिक शिक्षा को एक साथ जोड़ता है। वाटिका के केंद्र में विशेष कलात्मक इंस्टॉलेशन (स्थापना) बनाए गए हैं जो संविधान के विकास की कहानी बताते हैं। भारत की प्राचीन दार्शनिक परंपराओं से लेकर आजादी के बाद संविधान के निर्माण तक इन कहानियों को पत्थरों पर उकेरे गए चित्रों और धातु की नक्काशी के माध्यम से दिखाया गया है, जिनमें स्थानीय शिल्पकला का उपयोग किया गया है।
वाटिका के अलग-अलग हिस्सों में संविधान के चार स्तंभ, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को दर्शाने वाली मूर्तियाँ, भित्ति चित्र और उकेरे गए लेख लगाए गए हैं। यह वाटिका हर नागरिक को इन मूल्यों के गहरे अर्थों को समझने और आत्मसात करने के लिए प्रेरित करता है। वाटिका में संविधान निर्माताओं को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा स्थापित हैं। इनके जीवन और योगदान को दर्शाने के लिए प्रतिमाएं, पट्टिकाएं और क्यूआर कोड के माध्यम से इंटरएक्टिव जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
इस वाटिका की खास बात यह है कि इसमें पारंपरिक भारतीय डिजाइन जैसे- जाली कार्य, तोरण, और वटवृक्ष (बरगद का पेड़) जैसे प्रतीकों का आधुनिक स्थापत्य के साथ सुंदर मेल किया गया है। यह एक जीवित संग्रहालय की तरह है, जहाँ हर उम्र के लोग आकर संविधान को समझ सकते हैं ।
संविधान साहित्य वाटिका केवल एक देखने का स्थान नहीं, बल्कि एक सीखने और जुड़ने का माध्यम है। यहाँ संविधान केवल याद नहीं किया जाता, बल्कि उसे महसूस किया जाता है, समझा जाता है और मनाया जाता है।
यह वाटिका आज की और आने वाली पीढ़ियों को संविधान के मूल्यों से जोड़ने का एक सशक्त प्रयास है। वाटिका का एक भाग देश की साहित्यिक विरासत को समर्पित किया गया है, जिसके अंतर्गत देश के प्रबुद्ध साहित्यकारों जैसे महादेवी वर्मा, गिरीश कर्नाडको, हरिशंकर परसाई, हरिवंश रायबच्चन आदि के भित्तिचित्र (म्यूरल) प्रदर्शित किए गए हैं। भारत की 11 शास्त्रीय भाषाओं को वृक्ष और विरासत म्यूरल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस भाग में स्थानीय साहित्यकारों जैसे जिगर मुरादाबादी, दुर्गा दत्त त्रिपाठी, मंसूर उस्मानी इत्यादि को भी स्थान दिया गया है, जो शहर के नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
वाटिका में आने वाले नागरिकों, विशेषकर महिलाओं के लिए एक पुस्तक कैफे का भी निर्माण किया गया है जिसमें पाठकों के लिए विभिन्न प्रसिद्ध कृतियों का संकलन उपलब्ध है। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह, महापौर नगर निगम मुरादाबाद विनोद अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ, शैफाली सिंह, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, विधायक कुंदरकी ठाकुर रामवीर सिंह, मुरादाबाद शहर विधायक रितेश गुप्ता, मंडलायुक्त आञ्जनेय कुमार सिंह, नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल सहित अन्य अधिकारी एवं भारी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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